Wednesday, September 20, 2017
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POK में सर्जिकल स्ट्राइक पर पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अब दिया यह बड़ा बयान

पणजी : भारतीय सेना द्वारा पिछले साल सितंबर में पीओके में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक पर पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बड़ा बयान दिया है. पर्रिकर ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक की योजना जून 2015 में मणिपुर में सेना के काफिले पर उग्रवादी संगठन एनएससीएन द्वारा घात लगाकर किए गए हमले के बाद ही बनाई गई थी. वर्तमान में गोवा के मुख्यमंत्री और उस समय देश के रक्षा मंत्री रहे मनोहर पर्रिकर ने सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े घटनाक्रम के बारे में उद्योगपतियों के एक कार्यक्रम में बताया कि जब उन्हें जब चार जून 2015 की घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने अपमानित महसूस किया. इस घटना में 18 जवान शहीद हुए थे.

पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा, पश्चिमी सीमा पर 29 सितंबर (2016) के सर्जिकल स्ट्राइक के तैयारी की शुरुआत 9 जून 2015 को हुई थी. हमने इसकी योजना 15 महीने पहले ही बनाई थी. पूर्व रक्षा मंत्री ने बताया कि इसके लिए अतिरिक्त सैनिकों को प्रशिक्षित किया गया. प्राथमिकता के आधार पर उपकरण खरीदे गए. उन्होंने बताया कि डीआरडीओ द्वारा विकसित स्वाथी वैपन लोकेटिंग रडार का पाकिस्तानी सेना की फायरिंग यूनिट्स का पता लगाने में पहली बार सितंबर 2016 में प्रयोग किया गया. हालांकि लगभग तीन महीने बाद आधिकारिक रूप से इसे सेना में शामिल किया गया. उन्होंने कहा कि स्वाथी रडार की मदद से पाकिस्तानी सेना की 40 फायरिंग यूनिट्स को ध्वस्त किया गया.

पर्रिकर ने खुलासा किया कि मणिपुर में हुई मौतों के बाद मैंने अपमानित महसूस किया. 200 लोगों के एक छोटे से आतंकी संगठन द्वारा 18 डोगरा सैनिकों को मारना भारतीय सेना का अपमान था. हमने दोपहर और शाम को बैठकर पहले सर्जिकल स्ट्राइक पर काम किया, जिसे 8 जून की सुबह पूरा किया गया. इसमें (भारत-म्यामां सीमा पर) करीब 70-80 आतंकवादी मारे गए. उन्होंने कहा, यह बहुत सफल हमला था. उन्होंने कहा कि कुछ खबरों के विपरीत इसमें किसी हेलीकाप्टर का प्रयोग नहीं हुआ. उन्होंने कहा, मैंने सिर्फ आपातकाल में (जवानों को) बाहर निकालने के लिए हेलीकाप्टरों को (स्टैंड बाई पर) रखा था.

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