Monday, September 25, 2017
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डॉ. बलवीर सिंह तोमर को राजस्थान हाई कोर्ट ने इंडियन मेडिकल ट्रस्ट का सेटलर ट्रस्टी घोषित किया और शोभा तोमर की अर्जी ख़ारिज कर दी …

देश ही नहीं बल्कि दुनिया के बेहतरीन मेडिकल शिक्षा संस्थान में शुमार निम्स यूनिवर्सिटी….एक परिवार के आपसी कलह का कुरुक्षेत्र बनी….जिसमें एक तरफ थे निम्स यूनिवर्सिटी के चेयरमैन एंड चांसलर डॉक्टर बीएस तोमर….तो इस रणभूमि में दूसरी तरफ था उनका अपना ही परिवार….अपनी कड़ी मेहनत, लगन और अथक कोशिशों से डॉ. बीएस तोमर ने निम्स यूनिवर्सिटी को खड़ा किया…लेकिन उनकी ही पत्नी डॉ. शोभा तोमर ने शुरू किया षड़यंत्र का ऐसा खेल…जिसने डॉ. तोमर को स्तब्ध कर दिया…अपनों से संघर्ष की इस कहानी में आखिरकार जीत हुई डॉ. बीएस तोमर की….न्यायालय ने न केवल ट्रस्ट संबंधी मामले में डॉ. बीएस तोमर के पक्ष में फैसला सुनाया…बल्कि डॉ. शोभा तोमर और अनुराग तोमर के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का केस दर्ज करने का आदेश भी दे दिया…इसके अलावा कोर्ट ने डॉ. शोभा तोमर और अनुराग की ओर से लगाई गई अर्जी को भी खारिज कर दिया है.

राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 33 किमी की दूरी पर दिल्ली रोड पर सफेद इमारतों को देखकर लगता है कि हम किसी शहर में आ गए हैं…चंदवाजी से पहले किसी महानगर का एक हिस्सा नजर आने वाला ये इलाका है निम्स यूनिवर्सिटी…जिसकी एक-एक ईंट डॉ. बीएस तोमर की मेहनत, लगन और लगातार चुनौतियों से लड़ने वाली शख्सियत की कहानी बयान करती है…कैसे एक शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक ने शिक्षा और मेडिकल चिकित्सा के क्षेत्र में विश्व विख्यात संस्थान खड़ा किया…

जब एक इंसान किसी बड़े मकसद के लिए दुनिया के रण में निकलता है…तो उसकी सबसे बड़ी ताकत, सबसे बड़ी हिम्मत उसका परिवार होता है…लेकिन डॉ. तोमर का अपना परिवार ही उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया…

इंसान जो कुछ भी करता है..वो अपनों के लिए करता है..अपने परिवार के लिए करता है…अपने बच्चों को आगे बढ़ाने और उनका भविष्य संवारने के लिए करता है…लेकिन मेडिकल शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में दुनिया को राह दिखाने वाले डॉ. बीएस तोमर के लिए उनका अपना ही परिवार चुनौती बन गया…उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा बन गया…जो इंसान दुनिया की चुनौतियों का सामना कर रहा था..उसके सामने उसी का परिवार साजिश रच रहा था……

पटेल के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया
2015 में पटेल का पुनः त्याग पत्र दर्शाकर 2 फरवरी 2015 को अवैध मीटिंग होना दर्शाया गया
डॉ. तोमर की गैर मौजूदगी में 2 फरवरी 2015 को इस फर्जी मीटिंग में शोभा तोमर ने खुद को सैटलर ट्रस्टी और उपाध्यक्ष नामित कर लिया
ट्रस्ट में बहुमत स्थापित करने के लिए शोभा तोमर ने अपनी पुत्रवधु डॉ. स्वाति को ट्रस्टी बनाया
इसके लिए 2012 में त्यागपत्र दे चुकी उर्मिलाबेन पटेल को अवैध रूप से ट्रस्टी दर्शाया गया
फर्जी मीटिंग को सही साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दर्शायी गई मीटिंग को देवस्थान विभाग में दर्ज भी करवाया गया

कहते हैं कि एक कामयाब इंसान के पीछे एक महिला का हाथ होता है…ये भी कहते हैं कि पत्नी अपने पति की सफलता का रास्ता तैयार करती है…लेकिन डॉ. शोभा तोमर ने एक कामयाब इंसान को पीछे धकेलने की नाकामयाब कोशिश की…इतना ही नहीं…ट्रस्ट में एकाधिकार, सैंकड़ों करोड़ की संपति के लालच ने उन्हें इतना अंधा कर दिया…कि वो अपने ही पति डॉ. तोमर पर झूठे केस दर्ज करवाने से भी बाज़ नहीं आईं…डॉ. तोमर को छात्राओं के साथ छेड़छाड़, दुष्कर्म की कोशिश, एडमिशन देने के नाम पर अस्मत के सौदे जैसे कितने ही फर्जी और पूरी तरह झूठे केस में फंसाने की बार बार कोशिशें की गई…ज्यादातर मामलों में डॉक्टर तोमर अपनी बेगुनाही साबित कर चुके हैं…और कई मामलों में अनुसंधान जारी है…बहरहाल, डॉ. तोमर ने कभी भी ये नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें शोभा तोमर के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा…लेकिन इतिहास गवाह है…जब जब धर्म पर अधर्म हावी हुआ है…और सत्य की आंखों में धूल झोंकी गई है…तब तब एक सच्चे इंसान को हथियार उठाने पड़े हैं…फिर चाहे रणभूमि में दूसरे पाले में अपनों की फौज क्यों न हो…डॉ. तोमर का संघर्ष अभी जारी है….

कहते हैं भगवान के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं...और सत्य को धुंधला किया जा सकता है…मिटाया नहीं जा सकता…डॉ. तोमर के खिलाफ की गई साजिशों ने न्यायालय के दरवाजे पर दम तोड़ दिया…

निम्स यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और चांसलर डॉ. बी.एस. तोमर और उनकी पत्नी शोभा तोमर के बीच में चल रहे विवाद में आखिरकार कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया….हाईकोर्ट ने डॉ. तोमर के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर दिया…राजस्थान हाईकोर्ट ने इण्डियन मेडिकल ट्रस्ट, जयपुर की पूर्व न्यासी डॉ. शोभा तोमर और अनुराग तोमर की ओर से दायर रिट याचिकाओं को 1 अगस्त 2017 के आदेशानुसार खारिज करते हुए ट्रस्टियों की अधिकारिता को निर्णित कर दिया..

जयन्ती लाल पटेल की ओर से 2015 में दोबारा दिया गया त्याग पत्र अविश्वसनीय है
जब जयन्ती लाल पटेल ने 2012 में लिखित त्यागपत्र दे दिया तो वे 2015 में ट्रस्ट की मीटिंग की अध्यक्षता कैसे कर सकते थे ?
और इस तरह जयन्ती लाल डॉ. शोभा तोमर को उपसभापति नामित भी नहीं कर सकते थे
कोर्ट ने मीटिंग के लिए जारी स्पीड पोस्ट और कोरियर की रसीदों को भी संदेहपूर्ण माना
कोर्ट ने नोटिस जारी करने की संपूर्ण प्रक्रिया को छलपूर्ण मानते हुए 2 फरवरी 2015 की मीटिंग को शून्य और अवैध घोषित करार दिया
साथ ही डॉ. बी.एस. तोमर को ट्रस्ट का एकमात्र सेटलर ट्रस्टी घोषित कर दिया
कोर्ट ने डॉ. तोमर की ओर से रजिस्टर्ड करवाई गई संशोधित ट्रस्ट डीड को वैध निर्णीत किया
इसके साथ ही शोभा तोमर और अनुराग तोमर को निम्स विश्वविद्यालय में अवैध गतिविधियों का दोषी मानते हुए ट्रस्टी पद से हटाए जाने को वैध करार दिया
इस तरह डॉ. शोभा तोमर और अनुराग का इंडियन मेडिकल ट्रस्ट से अस्तित्व पूरी तरह खत्म हो चुका है

कोर्ट ने ये भी माना है कि डॉ. तोमर को बिना बताए शोभा तोमर और अनुराग तोमर की तरफ से राज्य सरकार और गैर सरकारी एजेंसियों से अवैध पत्र व्यवहार किया गया….ट्रस्ट की अवैध मीटिंग्स और पत्राचार न किये जाने को लेकर सहायक आयुक्त, प्रथम देवस्थान विभाग की ओर से पाबन्द करने के आदेश 4 अगस्त 2016 की पुष्टि करते हुये कोर्ट ने डॉ. बी.एस. तोमर की याचिका स्वीकार की है….जिसमें शोभा तोमर और अनुराग तोमर की ओर से ट्रस्ट की ओर से उक्त आदेश की अवहेलना करने पर न्यायिक अवमानना की विधिक कार्यवाही किये जाने का आदेश दिया है…बहरहाल, इस मामले में सत्य की जीत हुई है…और असत्य को मुंह की खानी पड़ी है…

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