Friday, November 24, 2017
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स्कूटर पर सियासी सफर और लालबत्ती, टीकमगढ़ के सांसद वीरेंद्र कुमार बने मंत्री

भोपाल: मध्यप्रदेश में सागर के रहने वाले और वर्तमान में टीकमगढ़ के सांसद डॉ वीरेन्द्र कुमार मंत्री बने तो सोशल मीडिया पर उनके हरे स्कूटर की तस्वीर भी घूमने लगी. गले में गमछा लपेटे लेकिन बगैर हेलमेट के. खैर छोटे शहरों में बड़े शहरों के कानून नहीं चलते. सागर और टीकमगढ़ की सड़कों में नेताजी की एक पहचान स्कूटर की सवारी भी है… अब हेलमेट पहन लें तो फिर पहचानेगा कौन.

बहरहाल मोदीजी के मंत्रिमंडल में मंत्री बनने के बाद सुर्खियां हैं कि चाय वाले के प्रधानमंत्री बनने के बाद पंचर बनाने वाला मंत्री बना है. वंशवाद की बहस में ऐसे लोगों का राजनीति में आना, फिर मंत्री बनना, लोकतंत्र में सुखद अहसास तो देता ही है सो उनकी कहानी मंत्री बनने के बाद चल निकली है. खटीक पहली बार 1996 में सागर से सांसद बने.

वीरेंद्र कुमार ने बचपन में परिवार के भरण-पोषण के लिए पिता के साथ साइकिल की दुकान पर पंक्चर भी बनाया. इस दौरान पढ़ाई भी चलती रही. सागर यूनिवर्सिटी से एमए किया, बाल श्रम में पीएचडी भी. सुना है अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान कोई पंक्चर सुधारता हुआ मिलता है, तो वो तुरंत उसके पास पहुंच जाते हैं. कई बार काम में उसकी मदद कर देते हैं, तो कभी पंक्चर बनाने के टिप्स देने लग जाते हैं. ये नहीं पता कि कोई बाल श्रमिक वहां काम करता मिलता है तो वे क्या करते हैं.

वीरेंद्र कुमार पुराने स्कूटर पर तो वो बगैर किसी तामझाम और सुरक्षा गार्ड के ही नजर आते हैं, वैसे उनके पास स्कॉर्पियो भी है. हालांकि मंत्री बनने के बाद उनका स्कूटर शायद घर में पड़ा रहे, या फिर वो यूं ही बाहर निकलें पता नहीं. मंत्री बने हैं, तो उनकी सादगी, शिक्षा और दलित होने को भी वजह बताया जा रहा है. लेकिन 6 बार सांसद कोई सिर्फ पहचान से तो बनता नहीं. जाहिर है कुछ काम भी रहे होंगे. इलाके में चौपाल लगाकर जनता की समस्याएं सुनने का श्रेय भी खटीक को है.

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