Monday, September 25, 2017
Home > Latest post > Movie Review: ‘डैडी’ के डैडी अर्जुन रामपाल तो अच्‍छे हैं, पर ठंडी है फिल्‍म

Movie Review: ‘डैडी’ के डैडी अर्जुन रामपाल तो अच्‍छे हैं, पर ठंडी है फिल्‍म

शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्‍म ‘डैडी’ कहानी है गैंगस्टर से एक राजनीजिज्ञ बनने वाले अरुण गवली की. इसमें अरुण गवली (अर्जुन रामपाल) की 1976 से 2012 तक की जिंदगी को समेटने की कोशिश की गयी है, फिल्‍म में दिखाया गया है की कैसे एक गरीब मिल मजदूर का बेटा गरीबी के चलते अपराध जगत की राह पकड़ लेता है और फिर उस दौर के भाई से भिड़ जाता है, जिसका राज पूरी मुंबई पर था. हांलाकी फिल्‍म में भाई का नाम मकसूद (फरहान अख़्तर) है पर इस किरदार के हालात, हाव भाव और काम साफ इशारा करते हैं कि यहां दाउद की ही बात हो रही है. इस कहानी में डैडी के पीछे लगा है एक पुलिस इंस्पेक्टर विजयकर (निशीकान्त कामत) और इसी की तहकीकात के साथ फिल्‍म की कहानी भी खुलती है.

फिल्‍म की सबसे बड़ी खामी है इसकी स्क्रिप्ट का नजरिया और अक्सर बायोपिक्स के साथ ये खामी देखने को मिलती है. बायोपिक्‍स में किसी किरदार के अच्छे काम पर ज्‍यादा रोशनी डाली जाती और वो बाते जो किरदार के हक में नहीं है या तो वो छुपा ली जाती है. या ऐसी फिल्‍मों में उन्हें किसी और नजरिये से पेश किया जाता है. दूसरी बात ये है की अरुण गवली की कहानी जानने में लोगों को रुचि हो सकती है पर इस किरदार के इमोशन के साथ लोग नहीं जुड़ पाते. वजह सीधी है की ये फिल्‍म किसी एक इमोशन को नहीं बल्की डैडी की पूरी कहानी बताती है जहां इमोशन का स्कोप कम ही रह जाता है. फिल्‍म की तीसरी मुश्किल है इसका कहानी कहने का तरीका… ये फिल्‍म कई बार फ्लैश बैक में जाती है और वापस आती है जिसकी वजह से आप टाइम फिल्‍म में कई बार भटक जाते हैं और उलझन में पड़ जाते हैं.

डैडी की सबसे बड़ी खूबी है इसका लुक. 70 और 80 के दशक को इस फिल्‍म में बड़े रियलिस्टिक ढ़ंग से पेश किया गया है. फिर चाहे वो फिल्‍म के कॉस्ट्यूम हों, हेयर स्टाइल, लोकेशन्स या उस वक्त का माहौल. इस फिल्‍म का निर्देशन अच्छा है और सिवाए कुछ जगहों के,  स्क्रिप्ट में बहुत से किरदार और बहुत सी घटनाएं होने की वजह से फिल्म आपको पकड़ कर रखती है. अभिनय की बात करुं तो अर्जुन के लिए ये टेलर-मेड रोल है जहां उनको बहुत ज्यादा इमोट नहीं करना पड़ा, वो जैसे हैं शायद ये किरदार भी वैसा ही है. इसलिए न तो वो आपको खराब लगते हैं और न ही आपको ये लगता है की उन्होंने कुछ हटके काम किया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please wait...

Subscribe to our newsletter

Want to be notified when our article is published? Enter your email address and name below to be the first to know.